एक मिलियन डालर दृश्य Summary In Hindi

एक मिलियन डालर दृश्य Summary In Hindi

The phrase “Ek Milian Dollar” translates to “One Million Dollars” in English. This is a commonly used term to refer to a significant amount of money, specifically one million US dollars. It is often used in financial contexts, such as discussing wealth, investments, or large financial transactions. Read More Class 11 Hindi Summaries.

एक मिलियन डालर दृश्य Summary In Hindi

एक मिलियन डालर दृश्य निबन्ध का सार

‘एक मिलियन डालर दृश्य’ इन्द्रनाथ चावला द्वारा लिखित है। प्रस्तुत निबन्ध में लेखक ने चण्डीगढ़ से शिमला की यात्रा का वर्णन किया है। इसके साथ ही लेखक ने सोलन नगर के सौन्दर्य का वर्णन करते हुए वहाँ के जन जीवन की समस्याओं की ओर संकेत किया है। लेखक अपने मित्र के साथ पहाड़ की यात्रा के लिए जा रहा है। दोनों लोग चण्डीगड़ से हिमाचल में किन्नौर की यात्रा के लिए निकले। किन्तु कालका शिमला सड़क पर स्थित धर्मपुर पहुँच कर उनकी गाड़ी खराब हो गई। शाम तक गाड़ी ठीक हुई और वे आगे बढ़ गए। मार्ग में सोलन में चाय पीने के लिए रुके। सोलन में कृषि विश्वविद्यालय और जिला बनने से वहाँ की आबादी बढ़ गई है।

परिवार एक-एक कमरे में रहते हैं जिससे गन्दगी दिखाई देती है। लेखक यहाँ कालका से शिमला जाने वाली छोटी लाइन की रेलगाड़ी का वर्णन करता है जिससे यात्रा करना अत्यन्त सुखद लगता है। गाड़ी बिगड़ जाने के कारण रात उन्हें शिमला में ही बिताने का निर्णय लेना पड़ा। पहाड़ी रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा होने के कारण वे आपस में बातचीत भी नहीं कर रहे थे।

तारादेवी पहुँच कर उन्होंने सुख की साँस ली। वहाँ शिमला की बत्तियाँ ऐसे दिखाई देती थीं जैसे आकाशलोक में कोई समारोह हो रहा हो, ऐसा लग रहा था शिमला तारादेवी से झिलमिलाता हुआ मिलन करने जा रहा हो। लेखक को लगा शिमला में हर रोज़ इसी तरह जगमगाहट होती है जैसे दीपावली हो। लेखक को वह दृश्य एक मिलियन डालर दृश्य लगता है जिसे देखने के लिए कोई भी विदेशी पर्यटक मुँह माँगे दाम दे सकता है। लेखक ने कुछ पूर्व भी शिमला की ऐसी ही अनोखी छवि देखी थी।

एक मोड़ आने पर वह दृश्य लुप्त हो गया। लेखक अपने मित्रों सहित शिमला पहुँच गया। कुछ दिनों बाद शिमला से चण्डीगढ़ लौटते हुए ढल्ली गाँव के पास पहुँच कर कालका के जगमगाते रूप को देखकर उसे शिमला की याद हो जाती है। कालका से चण्डीगढ़ की रोशनियाँ भी दिखाई देती हैं जैसे मखमली चादर पर सितारे जड़े गए हों।

भारत की सांस्कृतिक एकता Summary In Hindi

भारत की सांस्कृतिक एकता Summary In Hindi

The cultural unity of India refers to the remarkable coexistence of diverse cultures within the country, despite its multifaceted diversity. India is a nation where people from various castes, religions, languages, and cultures reside, yet they live together with a sense of cultural unity and pride. Read More Class 11 Hindi Summaries.

भारत की सांस्कृतिक एकता Summary In Hindi

भारत की सांस्कृतिक एकता का सार

लेखक कहता है कि देश राष्ट्रीयता का एक आवश्यक उपकरण है। भारत की अनेक नदियों को विभाजक रेखाएँ बतलाकर तथा भाषा और धर्मों एवं रीति-रिवाजों को आधार बनाकर कुछ लोगों ने हमारी राष्ट्रीयता को खंडित करने के लिए भारत को एक देश न कहकर उपमहाद्वीप कहा है। इस तरह उन लोगों ने हमारी राष्ट्रीयता को चुनौती दी है।

लेखक का मानना है कि प्रायः सभी देशों में जाति, भाषा और धर्मगत भेद हैं। जिस देश में भेद नहीं, उसकी इकाई शून्य की भान्ति दरिद्र इकाई है। सम्पन्नता भेदों में ही है। अतः भेदों के अस्तित्व को इन्कार करना मूर्खता होगी और उनकी उपेक्षा करना अपने को धोखा देना होगा। हमारे समाज में भेद और अभेद दोनों ही हैं। हमारे पूर्व शासकों ने अपने स्वार्थ के वश हमारे भेदों का अधिक विस्तार दिया जिससे हमारे देश में फूट पनपे और उनका उल्लू सीधा हो। उन शासकों ने हमारे अभेदों की उपेक्षा की। देश की नदियों को विभाजक रेखा बताने वाले यह भूल गए कि यही नदियाँ तो भारत भूमि को शस्य श्यामला बनाती हैं।

लेखक कहता है कि राजनीति की अपेक्षा धर्म और संस्कृति मनुष्य को हृदय के अधिक निकट हैं। भारतीय धर्मों में भेद होते हुए भी उनमें एक सांस्कृतिक एकता है। भारत में एक धर्म के आराध्य दूसरे धर्म में महापुरुष के रूप में स्वीकार किए गए।

मुसलमान और ईसाई धर्म एशियाई धर्म होने के कारण भारतीय धर्मों से बहुत कुछ समानता रखते हैं। रोमन कैथोलिकों की पूजा-अर्चना, धूप-दीप, व्रत-उपवास आदि हिन्दुओं जैसे ही हैं। ‘मुसलमान’ और ईसाइयों ने यहाँ की संस्कृति को प्रभावित किया तथा यहाँ की संस्कृति से प्रभावित भी हुए। तानसेन और ताज पर हिन्दु मुसलमान समान रूप से गर्व करते हैं। जायसी, रहीम, रसलीन आदि अनेक मुसलमान कवियों ने अपनी वाणी से हिन्दी की रसमयता बढ़ाई है।

जहाँ तक भाषा का प्रश्न है। उत्तर भारत की प्राय: सभी भाषाएँ संस्कृत से निकलती हैं। उर्दू को छोड़कर प्रायः भी भाषाओं की वर्णमाला एक नहीं तो एक-सी है। केवल लिपि का भेद है। भारत की विभिन्न भाषाओं के साहित्य का धूमिल इतिहास धुला-मिला सा है। मीरा, भूषण, संत तुकाराम, कबीर, दादू आदि। सारे भारत में समान रूप से आदर पाते हैं। विदेशी प्रभाव पड़ने पर भी हमारी राष्ट्रीय एकता अक्षुण्ण बनी हुई है।

भीड़ में खोया आदमी Summary In Hindi

भीड़ में खोया आदमी Summary In Hindi

The phrase “Bheed Me Khoya Aadmi” in English translates to “A Lost Man in the Crowd.” This expression represents a common feeling of anonymity and disorientation that individuals often experience when they are surrounded by a large number of people or when they feel lost in a bustling crowd. Read More Class 11 Hindi Summaries.

भीड़ में खोया आदमी Summary In Hindi

भीड़ में खोया आदमी निबन्ध का सारांश

भीड़ में खोया आदमी’ लीलाधर शर्मा पर्वतीय द्वारा लिखित निबंध है। इस निबंध में लेखक ने देश की बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न होने वाली विकट समस्याओं का वर्णन किया है। बढ़ती जनसंख्या से बेरोज़गारी, घटते हुए मकान और खाद्यान्न, अस्पतालों में बढ़ते मरीज, रेलों और बसों की भीड़ आदि सभी समस्याएं होती हैं।

लेखक के एक अभिन्न मित्र हैं-बाबू श्यामलाकान्त। वैसे तो वे परिश्रमी हैं, इमानदार हैं किन्तु निजी ज़िन्दगी के प्रति बड़े लापरवाह हैं। उमर में लेखक से छोटे होने पर भी अपने घर में बच्चों की फ़ौज खड़ी कर ली है। पिछले दिनों लेखक को उनकी लड़की के विवाह में शामिल होने के लिए हरिद्वार जाना था। पन्द्रह दिन पूर्व आरक्षण के लिए रेलवे स्टेशन पर गया। घंटों लाइन में लगने के बाद पता लगा कि किसी भी गाड़ी में स्थान खाली नहीं। विवश होकर लेखक को बिना आरक्षण के ही सफर करना पड़ा। लेखक ने पाया की गाड़ी में बहुत अधिक भीड़ थी और लोग ट्रेन की छत पर बैठ कर सफर कर रहे थे। । स्टेशन पर लेखक के मित्र का बड़ा लड़का उसे लेने आया था। उस लड़के को दो वर्ष हो चुके थे पढ़ाई पूरी किये। किन्तु अभी तक बेकार था। लेखक सोचने लगा कि इस छोटे से शहर का यह हाल है तो बड़े शहरों में बेकारों की कितनी भीड़ रही होगी।

लेखक ने अपने मित्र के घर आकर देखा कि उसका दो कमरों का मकान उसे बहुत छोटा पड़ रहा था लेखक के मित्र ने बताया कि बहुत ढूँढ़ने पर भी उसे यही मकान मिला। जनसंख्या बढ़ने के कारण मकान और खाद्यान्न घट रहे हैं। लेखक के सामने जब उसके मित्र के बच्चे आए तो उसे लगा कि वे सभी अस्वस्थ हैं। मित्र की पत्नी ने बताया कि अस्पतालों में इतनी भीड़ है कि डॉक्टर लोग ठीक से मरीजों को देख नहीं पाते।

मित्र की पत्नी ने यह भी बताया कि दुकानदार आजकल ग्राहक का स्वागत नहीं करते उल्टे ग्राहकों को अपना काम करवाने के लिए उनकी मिन्नत-समाजत या चापलूसी करनी पड़ती है। लेखक को इन सभी समस्याओं का एक ही कारण लगा देश की बढ़ती जनसंख्या। यदि समय रहते इस समस्या पर काबू न पाया गया तो ये समस्याएँ देश को खा जाएँगी।

रसायन और हमारा पर्यावरण Summary In Hindi

रसायन और हमारा पर्यावरण Summary In Hindi

Rasayan Aur Hamara Paryavaran” translates to “Chemistry and Our Environment” in English. This phrase represents the relationship between chemistry and the environment and underscores the impact of chemical processes, products, and pollution on the natural world. Read More Class 11 Hindi Summaries.

रसायन और हमारा पर्यावरण Summary In Hindi

रसायन और हमारा पर्यावरण निबन्ध का सार

‘रसायन और हमारा पर्यावरण’ डॉ० एम० एल० रामनाथन द्वारा लिखित है। लेखक ने इस निबन्ध में आधुनिक जीवन में रसायनों के दिन प्रतिदिन बढ़ रहे प्रयोग के प्रति मानव को सतर्क किया है। नि:संदेह रसायनों का प्रयोग आज अनिवार्य है। परन्तु हमें उनके प्रयोग में सावधानी बरतते हुए विनाशकारी और हानिकारक प्रभाव से जीवन को अधिक-से-अधिक सुरक्षित रखना चाहिए। प्रस्तुत निबन्ध में लेखक के बढ़ते प्रयोग द्वारा पर्यावरण के प्रदूषित होने की बात कही है। लेखक का कहना है कि रसायनों का प्रयोग आज के युग की आवश्यकता बन गया है। जीवन का प्रत्येक क्षेत्र रसायनों के प्रभाव से ही जुड़ा हुआ हैं।

रसायन न हो तो धरती पर जीवन ही सम्भव न हो पाता। चीनी, कोयला, तेल तथा बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाली एंटीबायोटिक्स, एस्प्रीन और पेनेसिलन जैसी औषधियाँ, सब्ज़ियाँ, फल, मेवे इत्यादि सभी रसायन होते हैं। आज रसायन विज्ञान काफ़ी उन्नत अवस्था में हैं। किन्तु चिंता का विषय रसायनों के बढ़ते एवं गलत प्रयोग से है। रसायनों का अधिक मात्रा में प्रयोग पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। आज रसायनों के ऐसे प्रयोग विनाशकारी होने के कारण चिंता का कारण हैं। हालांकि रसायन उद्योग में रसायनों के संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों के लिए कदम उठाए गए हैं।

खेतों में रसायनों का प्रयोग उत्पाद में वृद्धि में उपयोगी तो है किन्तु इसका अंधा-धुंध प्रयोग हानिकारक भी है। ये रसायन कैंसर जैसी भयंकर बीमारियाँ भी फैलाते हैं। रसायन तो शुरू से ही हमारे पर्यावरण का हिस्सा रहे हैं। हमें कम रसायनों के बारे में जानने की अधिक ज़रूरत है। हमें किसी भी रसायन का हानिकारक रूप ढूँढना होगा, तब तक उसका प्रयोग जारी रहना चाहिए किन्तु उसके गलत प्रयोग पर हाथ पीछे खींचना चाहिए।

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स्त्री के अर्थ स्वातंत्र्य का प्रश्न Summary In Hindi

स्त्री के अर्थ स्वातंत्र्य का प्रश्न Summary In Hindi

The question of “Stree Ke Arth Swatantraya” in English translates to “The Meaning of Womanhood and Freedom.” This is an important and social question that pertains to women’s rights, freedom, and their role in society.

स्त्री के अर्थ स्वातंत्र्य का प्रश्न Summary In Hindi

स्त्री के अर्थ स्वातंत्र्य का प्रश्न का सार

प्रस्तुत निबन्ध महादेवी वर्मा जी की कृति श्रृंखला की कड़ियाँ’ में संकलित है। प्रस्तुत निबन्ध में लेखिका ने मनुष्य के सामाजिक विकास की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि देते हुए आर्थिक दृष्टि से नारी की परवशता पर प्रकाश डाला है।

लेखिका कहती है कि धन सदा शक्ति का अनुगामी रहा है। शक्तिशाली ने ही अपनी इच्छा और सुविधानुसार धन का बँटवारा किया है। सारी राजनीतिक, सामाजिक तथा अन्य व्यवस्थाओं की रूपरेखा इसी शक्ति पर आधारित रही है। आदिकाल से ही स्त्री को सुख का साधन तो समझा गया किन्तु उसे आर्थिक रूप से पुरुष पर ही निर्भर रहना पड़ा है। पुरुष को हमारे समाज में भर्ता कहा गया और स्त्री सदा उसका मुँह ताकती रही है।

वेदकालीन समाज में नारी को केवल सन्तान पैदा करने वाली एवं घर-गृहस्थी सम्भालने वाली के रूप में ही देखा गया। उसकी आर्थिक स्वतन्त्रता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बस दहेज में जो कुछ दे दिया गया उसे ही काफ़ी समझा गया। पिता की सम्पत्ति में उसे कोई अधिकार नहीं दिया गया। सैंकड़ों साल बीत जाने पर भी स्त्री की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

एक सामाजिक प्राणी के लिए धन कितना महत्त्व रखता है, यह हर कोई जानता है। आर्थिक रूप से परवशता स्त्री के स्वाभाविक विकास और आत्म-विश्वास को प्रभावित करती है। भारतीय पुरुष-स्त्री को सहयात्री तो कहता है सहयोगी नहीं मानता। इसी विषमता को दूर करना होगा।

Stree Ke Arth Swatantraya Ka Prashn Summary In Hindi

Three Great Indians Summary

Three Great Indians Summary

Throughout history, India has been a cradle of remarkable individuals who have left an indelible mark on the world stage. Their stories of courage, vision, and transformation continue to inspire generations, shaping the nation’s identity and contributing to the global tapestry of human achievement. In this summary, we embark on a journey through time to explore the lives and legacies of “Three Great Indians” whose extraordinary contributions have left an enduring imprint on history. Read More Class 9th English Summaries.

Three Great Indians Summary

Three Great Indians Introduction:

This chapter gives brief sketches of three great Indians. They are :

  • Sri Satguru Ram Singh Ji,
  • Rani Laxmi Bai and
  • Udham Singh.

Sri Satguru Ram Singh Ji was a great patriot and a social reformer. He fought against many social evils. He asked his followers to fight for the freedom of the country. Laxmi Bai was the brave Rani of Jhansi. She opposed the British rule. She died fighting against the British forces. Udham Singh was one of the greatest martyrs of Mother India. He went to England and killed the villain of the Jallianwala Bagh massacre. He was arrested and sentenced to death. But his name will live for ever.

Three Great Indians Summary in English

Mother India gave birth to many great men and women in the 19th and 20th centuries. They fought not only against the prevailing social evils but also against the British rule. They included such great souls as Bal Gangadhar Tilak, Tantya Tope, Rani Laxmi Bai, Dadabhai Naoroji, Khudi Ram Bose, Sri Aurobindo, Lala Lajpat Rai, Pandit Jawahar Lal Nehru, Mahatma Gandhi and Bhagat Singh.

Sri Satguru Ram Singh Ji of Punjab was also a great social reformer and supporter of complete independence. He was born on 3 February, 1816 in a village in Ludhiana district. He was a guru of the Namdhari Sikhs. He gave his first sermon on the day of Baisakhi in 1857. He asked his followers to lead a simple and honest life. He wanted them to help the poor and to be free from all evils. He also wanted them to work for the country’s freedom: He was strongly opposed to such social evils as child marriage, drinking, casteism, nonvegetarianism, cow-slaughter and religious fanaticism.

He was against the British policy of ‘Divide and Rule’. He gave his followers the slogan of ‘Unite and Fight’. He started a movement of non-cooperation against the British rulers. It was he who introduced the concept of ‘Be Indian, buy Indian’. The followers of Satguru Ram Singh Ji raised a loud voice against the British. That was why they came to be known as ‘Kukas? They vowed to follow the teachings of their guru. So they were named Namdharis.

The Namdharis became a great force. The British rulers could not tolerate this. They let loose a reign of terror against the Kukas. A large number of them were put to death. Sri Satguru Ram Singh Ji was arrested. He was sent to jail in an unknown foreign land. But his spirit continues to guide his followers even today.

Rani Laxmi Bai was another great Indian. She was the Rani of Jhansi. She fought bravely against the British rule. She became the most popular leader in the First War of Independence (1857). Even her enemies appreciated her courage and her love of freedom.

Laxmi Bai was born on 16th December 1834 in Varanasi. Her childhood name was Manikarnika or Manu. She was married to Raja Gangadhar Rao of Jhansi. In 1851, she gave birth to a son.

Unfortunately both her son and her husband died by 1853. She adopted a son to be the king’s heir. But the British refused to accept him as the king of Jhansi, and took over the control of Jhansi. On 4 June, 1857, the soldiers stationed in Jhansi revolted against the British control. The Rani took the command in her own hands. The British forces laid a siege on Jhansi. The Rani continued to command her forces from inside the fort. But, at last, she had to leave Jhansi. She joined the forces of Tantya Tope at Kalpi. The British forces surrounded her from all sides. The Rani tried to escape but she was badly wounded. She breathed her last on the battlefield, on 18 June, 1858.

Udham Singh was one of the greatest martyrs of Mother India. He was the man who took revenge on General O’Dwyer who was the villain of the Jallianwala Bagh massacre.

Summary of Three Great Indians

On the day of Baisakhi in 1919, a large number of people had gathered in Jallianwala Bagh. They were holding a peaceful meeting. The British General O’Dwyer ordered firing on them. Thousands of men, women and children were killed. Many jumped into a well in order to save themselves. They were suffocated to death.

Udham Singh waited for 21 years to avenge this national insult. He went to England in 1940. There he shot O’Dwyer dead in full view of large gathering. Udham Singh was arrested and sentenced to death. He was hanged to death on 30 July the same year.
My Mother Summary

The Magic Violin Summary

The Magic Violin Summary

Amid the realm of enchanting tales and whimsical narratives, “The Magic Violin” stands as a beacon of wonder and imagination. This delightful story weaves a tapestry of music, mystery, and transformation, offering readers a journey into a world where melodies hold the power to evoke emotions and bring about astonishing change. Read More Class 9th English Summaries.

The Magic Violin Summary

The Magic Violin Introduction:

It is the story of a little boy. He is very poor. Yet he is always happy. His parents die when he is very young. He goes to work with a farmer. He works there for three years. But the farmer is a miser and a mean person. He gives the boy only three copper coins as his wages for three years.

The boy takes the coins and goes away. On his way he meets a beggar who is very hungry. The boy gives all the three copper coins to the beggar. The beggar is very pleased. He tells the boy that he is no beggar. He is, in fact, an angel. He gives the boy a magic gun and a violin. The magic gun never misses the aim.

The magic violin can make everyone dance. Now the boy goes back to the farmer again. The farmer says he is a thief and has him arrested. The magistrate orders that the boy should be hanged. The boy starts playing his magic violin. The magistrate, the hangman and the farmer have to keep dancing while the boy is playing it. He stops playing only when he has gone beyond their reach. The boy has a magic gun, so none dares to follow him.

The Magic Violin Summary in English

There once lived a boy in Sicily. He was poor but he was always happy. His parents died when he was young. However, he was always cheerful. In spite of all his troubles, he would keep laughing.

Once he went about the country, looking for work. He came to a farmhouse. He asked the farmer for work. He said that he would do any kind of work. The farmer was a miser and a very mean person. He thought he won’t have to pay the boy anything. So he told the boy that he could stay there and look after his goats.

The boy stayed at the farm for three years. Every day, he took the goats to the hills to graze. He had no companion to talk to. He felt very lonely. One day, he told his master that he wanted to leave. He asked for his wages of those three years.

At this the farmer became very angry. He said, “I never said anything about the wages when I gave you work.” Then he took out three copper coins and gave them to the boy as his wages for three years’ work. The boy looked at them and laughed. He put the coins in his pocket and went away.

That night he slept under a haystack. When he woke up in the morning, he saw an old beggar. The beggar said that he was very hungry. He said to the boy, “Can you spare me a copper coin or two ?” The boy gave the beggar all the three copper coins that he had.

The old beggar was very pleased. He told the boy that he was no beggar. He was an angel. He told the boy that he could grant him two wishes. The boy thought for a while. Then he asked for a violin the music of which could make all men dance. He also asked for a gun that never missed its aim. The old man smiled and gave the boy what he had asked for.

The boy went back to the farm where he had worked for three years. When he reached near the gate, he saw a bird flying up from the field. The boy, fired with his gun and the bird fell down. At once the farmer came out and said that the bird was his. And he ran to pick it up.

But before he could reach the bird, the boy began to play on his violin. It was a magic violin and the farmer had to dance to its music. He had to keep dancing because the boy would not stop playing. At last, he requested the boy to stop playing the violin and promised to give the boy a thousand silver coins. The boy asked the farmer to fetch the coins first. The farmer went dancing into the house. He came out with a thousand silver coins. He had hidden them under a board in the floor. The boy took the coins and went away.

Then the farmer went running into the village. He told the police that the boy was a thief. The boy was soon arrested. The silver coins were taken away from him. According to the laws of Sicily, the punishment for stealing was death. So the magistrate said that the boy · should be hanged.

The boy requested the magistrate to let him play the violin before he was hanged. The kind-hearted magistrate allowed him to do so. The farmer shouted in protest but the magistrate did not care. The boy began to play the violin. The magistrate, the hangman, the farmer and a large number of people who had gathered there, began to dance. They danced and danced while the boy played. They all became very tired, but they could not stop
dancing.

Summary of The Magic Violin

At last, the farmer declared that he would give the boy his one thousand silver coins. The magistrate said that he would give the boy his freedom. At this the boy said, “Very well, tell the hangman to fetch my gun and the silver pieces. Then I will stop.”

The hangman went dancing and brought the boy’s things. The boy said that he no longer trusted them. He asked them to tie the gun to his belt and to put the money in his pockets. They had to do as the boy wished. He still played on the violin because he would not trust them.
They all kept dancing until the sound of the violin died in the distance. Then they fell on the ground because they were all very tired.
Mercy Summary

The Nightingale and the Glow-worm Summary

The Nightingale and the Glow-worm

In the enchanting world of literature, fables hold a unique place as they effortlessly impart timeless moral lessons through captivating narratives. “The Nightingale and the Glow-worm” is one such fable that weaves a tale of contrasting virtues, teaching us profound insights about the nature of self-worth and the essence of true inner radiance. Read More Class 9th English Summaries.

The Nightingale and the Glow-worm Summary

The Nightingale and the Glow-worm Introduction:
The Nightingale and the Glow-worm Summary img-1
Once a nightingale was hungry. He saw a glow-worm in the dark. He wanted to eat the glow-worm. But the glow-worm was a good speaker. He said that both of them were useful for the world. The glow-worm cheered the world with his light. The nightingale cheered the world with his music. The same God had created both of them. The nightingale was impressed. He let the glow-worm go. He found his supper somewhere else.

The Nightingale and the Glow-worm Summary in English

A nightingale had pleased the villagers with his music throughout the day. At night he felt hungry. He looked around for food. He saw a glow-worm. He came down to eat it. The glowworm requested him to spare his life. He said that both of them were precious creatures. The glow-worm cheered the world with his light while the nightingale cheered the world with his music. The same God had created both of them to fulfil their duties in the world. The glow-worm’s speech had a good effect on the nightingale. He let the glow-worm go. He found his supper somewhere else.
Cherry Tree Summary

ऐ वीरो, भारतवर्ष के Summary In Hindi

ऐ वीरो, भारतवर्ष के Summary In Hindi

India, located in South Asia, is an ancient and significant country with a history spanning thousands of years. Its history is rich and diverse, encompassing religious, cultural, political, and economic traditions. Read More Class 11 Hindi Summaries.

ऐ वीरो, भारतवर्ष के Summary In Hindi

ऐ वीरो, भारतवर्ष के जीवन-परिचय

हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवियों में श्री हंस रुबाइयों के सफल प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं। उदयभानु ‘हंस’ का जन्म सन् 1930 ई० में हुआ था। हिन्दी रुबाइयाँ, धड़कन, सरगम, संत-सिपाही नामक काव्य संग्रह के प्रणेता हंस जी को हरियाणा के राज्य कवि का श्रेय प्राप्त है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें ‘संत-सिपाही’ पर निराला पुरस्कार से सम्मान दिया है। श्री हंस ने बिहारी की काव्य कला, निबन्ध रत्नाकार, हिन्दी के प्रमुख कलाकार, साहित्य-परिचय प्रभूतिगद्य जैसी रचनाओं द्वारा हिन्दी साहित्य की सेवा की है।

ऐ वीरो, भारतवर्ष के कविता का सारांश

‘ऐ वीरो, भारतवर्ष के’ कविता के रचयिता श्री उदयभानु हँस हैं। इस कविता के माध्यम से कवि ने भारतवासियों से आह्वान किया है कि अब समय आ गया है कि हमें अपने देश पर आक्रमण करने वालों को मुँह तोड़ जवाब देना चाहिए। हमें दुश्मन के खून से अपनी मातृभूमि का श्रृंगार करना है। उनके सामने हमें गुरु गोबिन्द सिंह जी और बंदा बैरागी की तरह अडिग बनकर खड़ा होना चाहिए। हम यह जानते हैं कि युद्ध करना अच्छी बात नहीं है परन्तु जब सामने वाला प्यार की बात नहीं समझता तो उसे ताकत की भाषा से ऐसा जवाब देना चाहिए कि वह आगे से आंख उठाकर हमारे देश की ओर नहीं देख सकेगा। हमें अपने उन वीर सपूतों की कुर्बानियाँ तथा उनके सपनों को याद रखना चाहिए जिन्होंने देश को आजाद करवाने में अपनी जान दे दी। हमें दुश्मनों को समाप्त करके उनके सपने पूरे करने हैं।

बुद्धम शरणम् गच्छामि Summary In Hindi

बुद्धम शरणम् गच्छामि Summary In Hindi

“Buddha Sharanam” translates to “I take refuge in the Buddha” in English. It’s a phrase commonly used by Buddhists to express their devotion and commitment to seeking refuge in the teachings, wisdom, and path exemplified by Gautama Buddha. Read More Class 11 Hindi Summaries.

बुद्धम शरणम् गच्छामि Summary In Hindi

बुद्धम शरणम् गच्छामि जीवन-परिचय

सुरेश चन्द्र वात्स्यायन का जन्म 7 फरवरी, सन् 1934 को पसरूर (पाकिस्तान) में हुआ था। इनके पिता पं० अमरनाथ शास्त्री अविभाजित पंजाब के सुप्रसिद्ध संस्कृत, हिन्दी सेवी शिक्षा विद शास्त्री थे। इनका पैतृक धाम हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में सुंकाली नामक गांव में है। इन्होंने लुधियाना से शिक्षा प्राप्त की। इन्हें हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी, जर्मन के अतिरिक्त वेद उपनिषद-पुराण-गुरुवाणी के साथ-साथ पंजाबी, उर्दू-बंगाली, तमिल भाषाओं का निजी अध्ययन किया।

सुरेश जी की काव्य प्रतिभा का परिचय छात्र-जीवन से ही मिलने लगा था।’अंकुर’, ‘प्रवाल’, और ‘मुकुल शैलानी’ इनके तीन काव्य संग्रह हैं। ये पंजाब और भारत सरकार द्वारा अपने लेखन कार्य के लिए कई बार पुरस्कृत हुए हैं। लोक धुन, नवगीत, अंग्रेज़ी सॉनेट के सामान्तर चतुर्दशी, उर्दू रुबाई के समानान्तर षटपदी और यति क्रम पर आधारित अतुकांत लेकिन लयपूर्ण कविताओं में सुरेश की सृजनशीलता अंकुरित और प्रवाहमयी है। सुरेश का कवि रूप बहु आयामी है। कवि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सही पहचान इनकी एक रूपता में है। इन्हें प्रगतिशील भारतीय चिन्तन के प्रतिनिधि मंत्र कविता के प्रवर्तक कवि रूप में मिल चुकी है। इन्हें अखिल भारतीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। भाषा विभाग, पंजाब ने इन्हें सन् 1992 में शिरोमणि साहित्यकार के रूप में अलंकृत किया है।

बुद्धम् शरणम् गच्छामि कविता का सार

‘वारिसनामा’-स्वराज के लिए बहेलह के कवि सुरेश चन्द्र वात्स्यायन हैं। ‘वारिसनामा’ एक कचहरी तथा कानुनी शब्द है जिसका अर्थ घर के बुजुर्ग अपने जमीन जायदाद आदि का वारिस नामांकित करते हैं। इस कविता में कवि ने भगत सिंह, सुखदेव, तथा राजगुरु आदि शहीदों की समाधियों को आज की पीढ़ी के लिए धरोहर बताया है। ये समाधियाँ ही इस नई पीढ़ी को नवनिर्माण के लिए प्रेरित करेंगी। आज वे वीर पुरुष नहीं हैं जो हमें हमारे इतिहास से परिचित करा सकें परन्तु उनके संदेश ही हमारे लिए वसीयत है कि हमें उनके बताए मार्ग पर चलना है तथा आगे बढ़ना है। आज कोई चाणक्य जैसा राजनीतिज्ञ नहीं जो चन्द्रगुप्त का निर्माण कर सके।

इसीलिए हमें अपने अन्दर छिपे चन्द्रगुप्त को बाहर निकालना है। हमें अपने समाज में छिपे उन लोगों को पहचान कर बाहर फेंकना है जो सभ्य पुरुष का मुखौटा पहने बैठे है। हम लोगों में त्रिशक्ति का अंश है इसलिए किसी सहारे की उम्मीद छोड़कर उठ खड़े होना है और हमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की तरह बनकर भारत माता के सम्मान की रक्षा करनी है।

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कहाँ तो तय था Summary In Hindi

कहाँ तो तय था Summary In Hindi

The poet of ghazal ‘Kahan to tay tha’ is Dushyant Kumar. in this the poet has given expression to human suffering. The poet has described both pessimistic and positive ideology. Even after independence, the general public is main a life of poverty. The primary desires of lifestyles: food, clothing and refuge are not being provided nicely to the commonplace man. Read More Class 11 Hindi Summaries.

कहाँ तो तय था Summary In Hindi

कहाँ तो तय था जीवन-परिचय

दुष्यन्त कुमार त्यागी का जन्म 1 सितम्बर, सन् 1933 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के राजपुर-नवादा में एक अच्छे खाते-पीते घराने में हुआ। इनकी शिक्षा मुजफ्फरनगर, नहरौर तथा इलाहाबाद से हुई। छात्र जीवन से ही लिखना आरम्भ कर दिया था परन्तु इलाहाबाद इनकी वास्तविक साहित्यिक जन्मभूमि इनके पिता जी इन्हें वकील बनाने या पुलिस की नौकरी करने के लिए कहते रहे परन्तु ये रचनाधर्मी थे तो इन्होंने अपना आजीविका साधन साहित्य को बना लिया। इन्होंने कई जगह नौकरियां की परन्तु रेडियो की नौकरी पसंद आई थी। दिल्ली रेडियो में स्क्रिप्ट लेखक का काम करते रहे। सन् 1966 में पदोन्नति प्राप्त कर भोपाल चले गए। वे प्रायः कहते थे कि वे किसी की नौकरी नहीं करते, वे तो कलम की नौकरी करते हैं। वे भोपाल के साहित्यिक-जंगल के शेर कहलाते थे। इसी शहर में रहते हुए इन्हें उनकी गज़ल के कारण विशेष पहचान मिली। 30 दिसम्बर, सन् 1975 को मात्र बयालीस वर्ष की अल्पायु में इनका देहांत हो गया।

दुष्यन्त कुमार बारह वर्ष की अवस्था में लिखने लगे थे। सूर्य का स्वागत’ (1957) काव्य संग्रह से उन्हें पहचान मिली। फिर सन् 1975 तक उनके तीन संग्रह प्रकाश में आए ‘आवाजों के घेरे,’ ‘जलते हुए बन का बसन्त’ तथा ‘साये में धूप’ नाटक के क्षेत्र में उनका योग अविस्मरणीय है। ‘एक कण्ठ विषदायी बहुचर्चित नाट्य काव्य है। इनकी प्रतिभा एकाधिक विधाओं में प्रस्फुटित हुई है और सभी में इन्होंने ज़मीन तोड़ी है। इनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा उसकी विवशता है। गजल लेखन में इन्हें विशेष ख्याति मिली है।

कहाँ तो तय था का सारांश

‘कहाँ तो तय था’ गज़ल के कवि दुष्यन्त कुमार हैं। इसमें कवि ने मानवीय पीड़ा को अभिव्यक्ति दी है। कवि ने निराशा और आशावादी दोनों विचारधारा का वर्णन किया है। आजादी के बाद भी आम जनता बदहाली का जीवन व्यतीत कर रही है। जीवन की मूल आवश्यकताः रोटी, कपड़ा और मकान तीनों आम आदमी को ठीक ढंग से नहीं मिल रहे हैं। आज भी आदमी भूखे पेट, नंगे तन सो रहा है परन्तु कवि को आशा है कि एक दिन अवश्य ही आम आदमी में जागरूकता आएगी और वह अपनी आवश्यकताओं के लिए आवाज उठाएगा। मानव, मानव से प्रेम करना सीख जाएगा। इसके लिए उसे इकट्ठे होकर प्रयत्नशील रहना चाहिए।